Polluter Pays Principle – Key Supreme Court Cases
1. M.C. Mehta v. Union of India (Oleum Gas Leak Case), 1987, Supreme Court
- इस मामले में Absolute Liability का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया।
- न्यायालय ने कहा कि खतरनाक उद्योगों द्वारा होने वाली किसी भी क्षति के लिए कोई अपवाद नहीं होगा।
- यह निर्णय आगे चलकर Polluter Pays Principle की बुनियाद बना।
महत्त्व: प्रदूषण से हुई क्षति के लिए दोष-आधारित दायित्व को अस्वीकार किया गया।
2. Indian Council for Enviro-Legal Action v. Union of India, 1996, Supreme Court
- रासायनिक उद्योगों द्वारा मिट्टी और भूजल प्रदूषण का मामला।
- सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रदूषक को—
- पर्यावरण की सफाई,
- क्षतिग्रस्त क्षेत्र के पुनर्स्थापन,
- और पीड़ितों को मुआवज़ा
स्वयं वहन करना होगा।
महत्त्व: Polluter Pays Principle को प्रतिपूरक + पुनर्स्थापनात्मक दायित्व के रूप में विकसित किया।
3. Vellore Citizens Welfare Forum v. Union of India, 1996, Supreme Court
- तमिलनाडु की टैनरी इकाइयों से जल प्रदूषण का मामला।
- न्यायालय ने Polluter Pays Principle और Precautionary Principle को भारतीय कानून का हिस्सा घोषित किया।
महत्त्व: PPP को संविधान के अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार) से जोड़ा गया।
4. M.C. Mehta v. Kamal Nath, 1997, Supreme Court
- निजी रिसॉर्ट द्वारा नदी के प्राकृतिक प्रवाह से छेड़छाड़।
- न्यायालय ने Public Trust Doctrine लागू करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुँचाने वाला प्रदूषक क्षतिपूर्ति देने के लिए बाध्य होगा।
महत्त्व: राज्य और निजी व्यक्तियों—दोनों पर PPP लागू।
5. A.P. Pollution Control Board v. Prof. M.V. Nayudu, 1999, Supreme Court
- जल प्रदूषण से संबंधित तकनीकी और वैज्ञानिक जोखिमों का मामला।
- न्यायालय ने पर्यावरणीय मामलों में सतर्क दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।
महत्त्व: PPP को वैज्ञानिक मूल्यांकन से जोड़ने की दिशा।
6. Sterlite Industries (India) Ltd. v. Union of India, 2013, Supreme Court
- तमिलनाडु में तांबा संयंत्र द्वारा गंभीर पर्यावरणीय क्षति।
- सर्वोच्च न्यायालय ने भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई।
महत्त्व: बड़े औद्योगिक प्रदूषकों पर आर्थिक रूप से प्रभावी दंड।
7. Paryavaran Suraksha Samiti v. Union of India, 2017, Supreme Court
- औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज ट्रीटमेंट का मामला।
- प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद करने और क्षतिपूर्ति के निर्देश।
महत्त्व: PPP को अनुपालन (compliance) से जोड़ा गया।
8. Goel Ganga Developers v. Union of India, 2018, Supreme Court
- पर्यावरणीय स्वीकृति के उल्लंघन का मामला।
- परियोजना को रोका गया और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई।
महत्त्व: रियल एस्टेट और विकास परियोजनाओं पर PPP का प्रभावी प्रयोग।
निष्कर्ष
इन निर्णयों से यह स्थापित हो चुका है कि Polluter Pays Principle:
- केवल जुर्माने तक सीमित नहीं,
- बल्कि environmental restoration, compensation और future prevention तक विस्तारित है।
सर्वोच्च न्यायालय ने इसे अब एक संवैधानिक और बाध्यकारी सिद्धांत के रूप में विकसित कर दिया है, जो भारत के पर्यावरण कानून की रीढ़ बन चुका है।
