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अनुच्छेद 21A बनाम अनुच्छेद 51A(क): निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का दायित्व किस पर और क्या न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय है?

 अनुच्छेद 21A बनाम अनुच्छेद 51A(क): निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का दायित्व किस पर और क्या न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय है?

अनुच्छेद 21A बनाम अनुच्छेद 51A(क): निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का दायित्व किस पर और क्या न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय है?


भारतीय संविधान में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का मुख्य, प्राथमिक और प्रवर्तनीय दायित्व राज्य पर है (अनुच्छेद 21A), जबकि माता-पिता/अभिभावकों का दायित्व सहायक, नैतिक-कानूनी कर्तव्य है (अनुच्छेद 51A(क)) जो स्वतः न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है। किसी टकराव की स्थिति में अनुच्छेद 21A प्रभावी (prevailing) होगा।


अनुच्छेद 21A: राज्य पर प्रवर्तनीय दायित्व

अनुच्छेद 21A (86वाँ संविधान संशोधन, 2002) के अनुसार 6 से 14 वर्ष के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना राज्य का कर्तव्य है।
यह मौलिक अधिकार है—अतः न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (justiciable) है। राज्य की विफलता पर रिट याचिका (अनुच्छेद 32/226) के माध्यम से उपचार संभव है।

न्यायिक आधार

  • Unni Krishnan v. State of Andhra Pradesh, 1993, Supreme Court: शिक्षा को जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का अभिन्न अंग माना गया; इसी पृष्ठभूमि में बाद में 21A जोड़ा गया।
  • Society for Un-aided Private Schools of Rajasthan v. Union of India, 2012, Supreme Court: 21A को लागू करने हेतु RTE Act, 2009 की संवैधानिक वैधता स्वीकार; राज्य की केंद्रीय भूमिका पुष्ट।

अनुच्छेद 51A(क): माता-पिता/अभिभावकों का कर्तव्य (अप्रवर्तनीय)

अनुच्छेद 51A(क) के अनुसार माता-पिता/अभिभावक का कर्तव्य है कि वे 6–14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराएँ।
परंतु यह मौलिक कर्तव्य है—स्वतः न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं। इसे सीधे रिट के माध्यम से लागू नहीं कराया जा सकता।

न्यायिक दृष्टिकोण

  • AIIMS Students’ Union v. AIIMS, 2002, Supreme Court: मौलिक कर्तव्य प्रेरक/दिशानिर्देशक हैं; सामान्यतः अप्रवर्तनीय।
  • Ramlila Maidan Incident, 2012, Supreme Court: मौलिक कर्तव्यों की नैतिक-सामाजिक भूमिका रेखांकित; पर प्रत्यक्ष प्रवर्तन नहीं।

 टकराव की स्थिति में कौन प्रभावी?

  • संवैधानिक श्रेणीकरण:
    • मौलिक अधिकार (21A) > मौलिक कर्तव्य (51A)
  • निष्कर्ष: यदि राज्य और माता-पिता के दायित्वों में टकराव दिखे, तो राज्य का दायित्व प्रभावी होगा। राज्य यह कहकर उत्तरदायित्व से नहीं बच सकता कि माता-पिता ने कर्तव्य नहीं निभाया।

 RTE Act, 2009: दोनों दायित्वों का समन्वय

Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 अनुच्छेद 21A को क्रियान्वित करता है:

  • राज्य: विद्यालयों की उपलब्धता, शिक्षक, आधारभूत संरचना, निःशुल्क शिक्षा।
  • माता-पिता: बच्चे का नामांकन और निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करने में सहयोग।
    यहाँ भी प्रवर्तन का भार राज्य पर रहता है; माता-पिता का दायित्व सहायक है।

न्यायालय क्या कर सकता है?

  • राज्य के विरुद्ध: स्कूल/शिक्षक/इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, फीस/भेदभाव जैसी बाधाओं पर न्यायिक निर्देश
  • माता-पिता के विरुद्ध: सामान्यतः प्रत्यक्ष रिट नहीं; पर कानून (जैसे RTE के अंतर्गत प्रशासनिक उपाय) के माध्यम से परोक्ष प्रभाव संभव।

निष्कर्ष

  • अनुच्छेद 21A: प्रवर्तनीय मौलिक अधिकार—राज्य पर मुख्य दायित्व
  • अनुच्छेद 51A(क): अप्रवर्तनीय मौलिक कर्तव्य—माता-पिता पर सहायक दायित्व
  • प्रभाविता: किसी भी संघर्ष में 21A प्रभावी रहेगा और न्यायालय द्वारा लागू किया जा सकेगा।

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