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BNS की धारा 3(1) के तहत 'साधारण अपवाद' का क्या अर्थ है?

 

आज हम भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 3(1) के तहत 'साधारण अपवाद' (General Exceptions) के सिद्धांत को बहुत ही सरल भाषा में डिकोड करेंगे।

BNS की धारा 3(1) कोई अपराध या सजा नहीं बताती, बल्कि यह पूरे क्रिमिनल लॉ को पढ़ने का एक 'Rule of Interpretation' (व्याख्या का नियम) है। यह धारा स्पष्ट रूप से कहती है कि इस पूरी संहिता में दी गई किसी भी अपराध की परिभाषा (definition of an offence), हर दंडनीय प्रावधान (penal provision), और हर दृष्टांत (Illustration) को हमेशा 'साधारण अपवाद' (General Exceptions) नामक अध्याय (अध्याय III) में शामिल अपवादों के अधीन (subject to) समझा जाना चाहिए।

कानून आगे कहता है कि भले ही उन अपवादों को हर परिभाषा या धारा में बार-बार न दोहराया गया हो, फिर भी वे हर अपराध पर लागू होंगे।

Short Trick for Memory: Students, Exams के लिए इसे क्रिमिनल लॉ की "Invisible Shield" (अदृश्य ढाल) के रूप में याद रखें! जब भी आप BNS में 'चोरी', 'हत्या' या 'धोखाधड़ी' जैसी कोई भी धारा पढ़ते हैं, तो मान लें कि Chapter III (General Exceptions) की यह ढाल उस धारा के साथ अदृश्य रूप से (invisibly) जुड़ी हुई है। आपको हर अपराध को इन अपवादों के चश्मे से ही देखना होगा।

आइए इसे BNS में दिए गए दो बहुत ही शानदार दृष्टांतों (Illustrations) से समझते हैं:

1. 7 साल से कम उम्र के बच्चे का नियम (The 7-Year Rule): संहिता (Sanhita) में हत्या या चोरी जैसे अपराधों की परिभाषाओं में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि 7 साल से कम उम्र का बच्चा ये अपराध नहीं कर सकता। लेकिन, धारा 3(1) यह नियम बनाती है कि इन सभी परिभाषाओं को हमें उस साधारण अपवाद के साथ पढ़ना होगा जो कहता है कि "7 साल से कम उम्र के बच्चे द्वारा किया गया कोई भी कार्य अपराध नहीं है" (BNS की धारा 20)।

  • Example: यदि एक 6 साल का बच्चा खेलते हुए किसी को धक्का दे दे और उस व्यक्ति की मौत हो जाए, तो वह बच्चा 'हत्या' का दोषी नहीं है, क्योंकि धारा 3(1) ने हत्या की परिभाषा पर धारा 20 का अपवाद लागू कर दिया है।

2. पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी (Arrest by Police Officer): मान लीजिए 'A' एक पुलिस अधिकारी है। वह बिना वारंट के 'Z' को गिरफ्तार करता है, जिसने एक हत्या (murder) की है। सामान्य तौर पर किसी को उसकी इच्छा के विरुद्ध पकड़ कर रखना 'सदोष परिरोध' (wrongful confinement - धारा 127) का अपराध है। लेकिन, यहाँ 'A' इस अपराध का दोषी नहीं है।

  • Why? क्योंकि 'A' कानून द्वारा 'Z' को गिरफ्तार करने के लिए बाध्य (bound by law) था। और साधारण अपवाद (धारा 14) यह कहता है कि जो व्यक्ति कानून द्वारा किसी कार्य को करने के लिए बाध्य है, उसका कार्य अपराध नहीं है।

Conclusion for your Legal Practice: As a Judicial Aspirant or a practicing Advocate, यह धारा आपके लिए 'Master Key' है। जब भी आप किसी आरोपी (accused) का बचाव (defense) करेंगे, तो आप Prosecution की लगाई गई हर धारा (जैसे Section 103 Murder या Section 303 Theft) को धारा 3(1) की मदद से Chapter III (General Exceptions) से जोड़ेंगे, ताकि यह साबित किया जा सके कि आरोपी का कार्य अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।

Keep your concepts crystal clear and keep revising!

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