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BNS में 'दस्तावेज़' की परिभाषा में डिजिटल रिकॉर्ड कैसे शामिल हैं?

आज हम बात करेंगे कि नए कानून में 'दस्तावेज़' (Document) की परिभाषा ने डिजिटल दुनिया को कैसे अपनाया है।

BNS की धारा 2(8) के तहत 'दस्तावेज़' की परिभाषा को आज के तकनीकी युग (technological era) के अनुसार बहुत ही व्यापक और आधुनिक (modern) बना दिया गया है।

BNS में 'दस्तावेज़' (Document) की नई परिभाषा: कानून के अनुसार, कोई भी विषय (matter) जो किसी पदार्थ (substance) पर अक्षरों (letters), अंकों (figures) या चिह्नों (marks) द्वारा व्यक्त या वर्णित किया गया हो, और जिसका उपयोग उस विषय के साक्ष्य (evidence) के रूप में किया जा सके या किया जाने का इरादा हो, वह 'दस्तावेज़' है।

डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का स्पष्ट समावेश (Explicit Inclusion of Digital Records): The most important exam update for you is this: BNS 2023 में स्पष्ट रूप से "इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड (electronic and digital record)" को 'दस्तावेज़' की परिभाषा के अंदर शामिल कर लिया गया है।

इसका सीधा अर्थ यह है कि अब 'दस्तावेज़' का मतलब केवल कागज़ (paper) तक सीमित नहीं है। कोई भी जानकारी चाहे वह किसी भी माध्यम (means) या पदार्थ (substance) पर बनाई गई हो, वह दस्तावेज़ है।

Let us understand this with simple day-to-day examples:

  • Traditional Documents: एक कागज़ पर लिखा हुआ कॉन्ट्रैक्ट (contract), बैंक का चेक (cheque), पावर-ऑफ-अटॉर्नी (power-of-attorney), या ज़मीन का कोई नक्शा (map) - ये सब पारंपरिक दस्तावेज़ हैं।
  • Digital Documents (The Update): आपके मोबाइल में सेव की गई WhatsApp चैट्स, आपके ई-मेल्स (e-mails), कंप्यूटर या पेन ड्राइव में मौजूद डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट, इलेक्ट्रॉनिक रसीद (electronic receipt), या सर्वर पर स्टोर किया गया कोई भी डिजिटल डेटा - ये सब भी अब BNS के तहत 'दस्तावेज़' माने जाएंगे क्योंकि ये 'इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड' की श्रेणी में आते हैं।

Short Trick for Memory: आप इसे 'S-L-F-M = E' फार्मूला से याद रख सकते हैं:

  • S = Substance (पदार्थ - चाहे कागज़ हो या हार्ड ड्राइव)
  • L = Letters (अक्षर)
  • F = Figures (अंक)
  • M = Marks (चिह्न)
  • E = Evidence (साक्ष्य) यदि किसी भी Substance पर L, F, या M मौजूद हैं और वह Evidence बन सकता है (चाहे वह फिजिकल हो या डिजिटल), तो वह BNS की धारा 2(8) के तहत Document है।

Why is this important? (Legal Insight): आज के समय में ज़्यादातर आर्थिक अपराध (economic offences) और धोखाधड़ी (cheating) डिजिटल माध्यमों से हो रहे हैं। BNS में इस नई परिभाषा के शामिल होने से पुलिस और न्यायालयों (Courts) के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (electronic evidence) को दस्तावेज़ मानकर जालसाजी (forgery) और धोखाधड़ी के मामलों में मुकदमा चलाना बहुत स्पष्ट और आसान हो गया है।

So keep this concept crystal clear in your mind. If a digital file can be used as evidence in a court of law, it is completely recognized as a "document" under BNS!


डिजिटल रिकॉर्ड को अदालत में साक्ष्य (evidence) के रूप में कैसे पेश किया जाता है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) डिजिटल रिकॉर्ड के बारे में क्या कहती है? BNS की धारा 2(8) यह परिभाषित करती है कि कोई भी विषय जो अक्षरों (letters), अंकों (figures) या चिह्नों (marks) द्वारा किसी पदार्थ पर व्यक्त किया गया हो, और जिसका उपयोग साक्ष्य (evidence) के रूप में किया जा सके, वह 'दस्तावेज़' है। इस परिभाषा में स्पष्ट रूप से इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड को शामिल किया गया है

BNS की धारा 2(39) यह भी प्रावधान करती है कि जो शब्द इस संहिता में परिभाषित नहीं हैं, लेकिन 'Information Technology Act, 2000' या 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023' में परिभाषित हैं, उनका ठीक वही अर्थ लिया जाएगा जो उन अधिनियमों में दिया गया है।

अदालत में डिजिटल रिकॉर्ड कैसे पेश किया जाता है? (Information Outside Provided Sources) एक वकील या जज के रूप में आपको यह जानना बहुत जरूरी है कि केवल WhatsApp chat या CCTV की CD कोर्ट में रख देने से वह साक्ष्य नहीं बन जाता। इसकी एक तय प्रक्रिया है:

  1. Certificate of Authenticity (प्रमाणपत्र): भारत में डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को पुराने 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम' (Indian Evidence Act, 1872) की धारा 65B, और नए 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023' की धारा 63 के तहत पेश किया जाता है। जब भी आप कोई प्रिंटआउट, CD, या पेन-ड्राइव कोर्ट में पेश करते हैं, तो आपको उसके साथ एक सर्टिफिकेट (हलफनामा) देना होता है।
  2. Conditions of the Certificate: इस सर्टिफिकेट में यह घोषणा करनी होती है कि जिस कंप्यूटर या मोबाइल से यह डेटा निकाला गया है, वह उस समय सही तरीके से काम कर रहा था, वह व्यक्ति के नियमित नियंत्रण (lawful control) में था, और डेटा के साथ कोई छेड़छाड़ (tampering) नहीं की गई है।

Recent Supreme Court Judgment (Outside Sources): आपके Judicial Service Exams के लिए सुप्रीम कोर्ट का एक बहुत ही Landmark Judgment याद रखना जरूरी है - ***Arjun Panditrao Khotkar vs. Kailash Kushanrao Gorantyal (2020)***। इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया था कि अदालत में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (electronic evidence) को स्वीकार करने के लिए धारा 65B का Certificate पेश करना mandatory (अनिवार्य) है। इसके बिना कोर्ट डिजिटल एविडेंस को नहीं मानेगा।

Short Trick for Memory: जब भी आप अपने एग्जाम में 'Document' (दस्तावेज़) की परिभाषा लिखें, तो मेरी यह छोटी सी ट्रिक याद रखें: "EDI in BNS"

  • Electronic and
  • Digital records are
  • Included in Section 2(8) of BNS.

Example to understand the whole concept: मान लीजिए A ने B को ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकी दी। यहाँ वह ईमेल BNS की धारा 2(8) के तहत एक "दस्तावेज़" है। लेकिन जब B इस ईमेल को कोर्ट में साबित करना चाहेगा, तो उसे उस ईमेल का प्रिंटआउट लेना होगा और साथ में साक्ष्य अधिनियम के तहत एक Certificate लगाना होगा कि उसने यह प्रिंटआउट अपने खुद के लैपटॉप से निकाला है और ईमेल से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है



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