आज हम Criminal Law के एक बहुत ही तकनीकी लेकिन महत्वपूर्ण सिद्धांत 'रचनात्मक कब्जा' (Constructive Possession) पर चर्चा करेंगे, जिसे भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 3(3) में समझाया गया है।
कानून की नज़र में 'कब्जा' (Possession) हमेशा केवल भौतिक (physical) होना ज़रूरी नहीं है। BNS की धारा 3(3) स्पष्ट करती है कि जब कोई संपत्ति किसी व्यक्ति की ओर से (on account of that person) उसके पति या पत्नी (spouse), लिपिक (clerk), या सेवक (servant) के कब्जे में होती है, तो इस संहिता के अर्थ में वह संपत्ति उसी मुख्य व्यक्ति के कब्जे में मानी जाती है।
इसमें एक बहुत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण (Explanation) भी जोड़ा गया है: यदि किसी व्यक्ति को लिपिक या सेवक के रूप में केवल अस्थायी रूप से (temporarily) या किसी विशेष अवसर (particular occasion) के लिए काम पर रखा गया है, तो उसे भी इस उपधारा के तहत लिपिक या सेवक ही माना जाएगा।
Short Trick for Memory (S-C-S Rule): Judicial Exams में इसे याद रखने के लिए "S-C-S" फार्मूला का उपयोग करें:
- S = Spouse (पति/पत्नी)
- C = Clerk (लिपिक)
- S = Servant (सेवक)
यदि संपत्ति इन तीनों में से किसी के भी पास 'आपकी ओर से' रखी है, तो कानूनन वह आपके ही 'कब्जे' में है।
Practical Example & Connection with Other Laws: एक बेहतरीन वकील या जज बनने के लिए आपको इस परिभाषा को BNS के संपत्ति संबंधी अपराधों (Offences against property) से जोड़ना आना चाहिए।
मान लीजिए 'A' अपनी एक महंगी घड़ी अपने नौकर 'B' को घर सुरक्षित रखने के लिए देता है। अब भौतिक रूप से (physically) घड़ी 'B' के हाथों में है, लेकिन धारा 3(3) के रचनात्मक कब्जे के सिद्धांत के अनुसार, कानून की नजर में वह घड़ी अभी भी मालिक 'A' के ही कब्जे में है।
- चोरी (Theft) से जुड़ाव: यदि कोई व्यक्ति रास्ते में नौकर 'B' के हाथ से वह घड़ी छीन कर भाग जाता है, तो उस व्यक्ति ने वह संपत्ति 'A' के कब्जे से चुराई है, क्योंकि नौकर का कब्जा मालिक का कब्जा माना जाता है।
- सेवक द्वारा चोरी (Theft by Servant - धारा 306): यदि वह नौकर 'B' खुद बेईमानी (dishonestly) से उस घड़ी को लेकर भाग जाता है, तो उस पर सामान्य चोरी नहीं, बल्कि "मालिक के कब्जे की संपत्ति की लिपिक या सेवक द्वारा चोरी" का मुकदमा चलेगा। यह BNS की धारा 306 के तहत एक गंभीर अपराध है, जिसमें सात साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
So my dear students, the concept of Constructive Possession under Section 3(3) is the backbone for deciding the legal possession in property-related offences like Theft, Extortion, and Criminal Breach of Trust. Keep your concepts crystal clear and keep revising!
