भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के प्रारंभिक अध्याय की धारा 3(6) 'समान ज्ञान या आशय' (Similar Knowledge or Intention) के सिद्धांत को स्पष्ट करती है। यदि आपने धारा 3(5) (Common Intention) को अच्छी तरह समझ लिया है, तो धारा 3(6) को समझना आपके लिए बहुत आसान हो जाएगा।
धारा 3(6) का कानूनी प्रावधान क्या है?
संहिता के अनुसार, जब कोई कार्य केवल इसलिए आपराधिक होता है क्योंकि वह किसी 'आपराधिक ज्ञान या इरादे' (criminal knowledge or intention) के साथ किया गया है, और वह कार्य कई व्यक्तियों द्वारा मिलकर किया जाता है, तो उन व्यक्तियों में से जो भी व्यक्ति उस ज्ञान या इरादे के साथ उस कार्य में शामिल होता है, वह उस कार्य के लिए उसी प्रकार उत्तरदायी (liable) होगा मानो उसने वह कार्य उसी ज्ञान या इरादे के साथ अकेले किया हो।
सरल भाषा में इसका अर्थ (Meaning in Simple Words):
क्रिमिनल लॉ में कई बार शारीरिक कार्य (physical act) एक जैसा होता है, लेकिन अपराध की गंभीरता व्यक्ति के दिमाग (Mens Rea) पर निर्भर करती है। धारा 3(6) यह कहती है कि यदि कई लोग मिलकर कोई अपराध कर रहे हैं, लेकिन उनके बीच कोई 'सामान्य इरादा' (pre-arranged plan) नहीं था, तो हर व्यक्ति को केवल उसी हद तक सजा मिलेगी जो उसके खुद के दिमाग में चल रहे 'इरादे या ज्ञान' से मेल खाती हो।
Short Trick for Memory: Exams के लिए इसे "Jaisa Irada, Waisi Saja" (जैसा इरादा, वैसी सजा) या "MDC Rule" (Mind Dictates the Crime) के नाम से याद रखें। अपराध में शामिल हर व्यक्ति का अपना अलग-अलग दिमाग (mind) उसका अपना अलग अपराध तय करेगा।
Practical Example and Connection with Section 3(9):
आइए इसे एक बेहतरीन उदाहरण से समझते हैं, जिसे BNS की धारा 3(9) के दृष्टांत (Illustration) के साथ जोड़कर पढ़ना सबसे सही तरीका है।
मान लीजिए Z एक व्यक्ति है। A, अचानक और गंभीर प्रकोपन (grave and sudden provocation) में आकर Z पर हमला करता है। उसी समय B, जिसकी Z से पुरानी दुश्मनी है और वह Z को मारना चाहता है, मौके का फायदा उठाकर इस हमले में A की मदद करता है और Z की मौत हो जाती है।
- यहाँ कार्य (Z को मारना) दोनों ने मिलकर किया है। लेकिन दोनों का ज्ञान और इरादा (Knowledge and Intention) अलग-अलग था।
- चूँकि A ने प्रकोपन (provocation) में आकर काम किया, इसलिए उसका इरादा हत्या का नहीं था, और वह केवल 'आपराधिक मानव वध' (Culpable Homicide) का दोषी होगा।
- लेकिन B का 'आपराधिक ज्ञान और इरादा' Z की हत्या (Murder) करने का था, इसलिए धारा 3(6) और 3(9) के संयुक्त प्रभाव से B 'हत्या' (Murder) का दोषी माना जाएगा।
Difference between Section 3(5) and Section 3(6):
एक Expert Lawyer के तौर पर आपको इन दोनों धाराओं का अंतर पता होना चाहिए:
- धारा 3(5) (Common Intention): इसमें सभी अपराधियों की पहले से एक योजना (pre-arranged plan) होती है। इसलिए सब को एक ही सजा मिलती है (One for All, All for One)।
- धारा 3(6) (Similar Intention): इसमें अपराधियों का काम एक हो सकता है, लेकिन उनकी पहले से कोई योजना नहीं होती। वे बस मौके पर एक साथ आ जाते हैं। इसलिए, हर अपराधी को उसके अपने व्यक्तिगत इरादे (individual intention) के अनुसार अलग-अलग सजा मिलती है।
Supreme Court Insight:
ऐतिहासिक मामले Mahbub Shah v. Emperor (जिसमें पुरानी IPC की धारा 34 और 35 पर चर्चा की गई थी, जो अब BNS की धारा 3(5) और 3(6) हैं) में न्यायालय ने "Common Intention" (सामान्य आशय) और "Similar Intention" (समान आशय) के बीच का यह बारीक अंतर स्पष्ट किया था। अदालत ने कहा था कि सिर्फ इसलिए कि दो लोग एक ही व्यक्ति पर हमला कर रहे हैं (Similar Intention), यह नहीं माना जा सकता कि उनकी पहले से कोई योजना थी (Common Intention)। ऐसे मामलों में धारा 3(6) लागू होती है।
So my dear students, whenever a problem asks about multiple accused acting without a pre-arranged plan, always apply the test of Section 3(6) to determine their individual liability based on their respective knowledge and intent! Keep revising and building your concepts logically.
