आज के इस लेक्चर में हम भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 3(7) का बहुत ही गहराई से विश्लेषण (deep analysis) करेंगे।
BNS की धारा 3(7) आपराधिक कानून के उस सिद्धांत को स्पष्ट करती है जहाँ कोई अपराध 'आधा कार्य' (Act) और 'आधी चूक' (Omission) को मिलाकर किया जाता है।
कानूनी प्रावधान (Legal Provision):
इस धारा के अनुसार, जहाँ कहीं भी किसी कार्य (act) द्वारा या किसी चूक (omission) द्वारा कोई निश्चित प्रभाव (effect) पैदा करना, या उस प्रभाव को पैदा करने का प्रयास करना अपराध है, वहाँ यह समझा जाना चाहिए कि वह प्रभाव आंशिक रूप से (partly) किसी कार्य द्वारा और आंशिक रूप से किसी चूक द्वारा पैदा करना भी वही समान अपराध (same offence) है।
सरल शब्दों में (In Simple Words): मान लीजिए किसी अपराध को करने के लिए केवल एक गलत काम करना (physical act) ही काफी है, या अपनी कानूनी ड्यूटी न निभाना (illegal omission) ही काफी है। लेकिन यदि कोई अपराधी अपनी चालाकी से इन दोनों को मिला देता है—यानी वह थोड़ा शारीरिक कार्य करता है और थोड़ी अवैध चूक करता है, जिससे पीड़ित को अंतिम नुकसान (final effect) पहुँचता है—तो कानून उसे यह कहकर नहीं छोड़ेगा कि उसने अपराध का कोई एक तरीका पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया। कानून की नजर में इन दोनों का मिश्रण (mixture) भी वही पूरा अपराध माना जाएगा।
Short Trick for Memory:
Exams के लिए इसे "The 50-50 Rule" (Half Act + Half Omission = Full Offence) के नाम से याद रखें।
वैधानिक दृष्टांत (Statutory Illustration): BNS में इसे स्पष्ट करने के लिए एक बहुत ही बेहतरीन उदाहरण दिया गया है: मान लीजिए 'A' जानबूझकर 'Z' की मृत्यु कारित करना (cause death) चाहता है। इसके लिए 'A' दो तरीके अपनाता है:
- वह अवैध रूप से 'Z' को खाना नहीं देता (illegally omitting to give Z food - यह एक 'चूक' या Omission है)।
- वह 'Z' को बुरी तरह पीटता है (beating Z - यह एक 'कार्य' या Act है)।
इन दोनों के मिले-जुले प्रभाव (combined effect) के कारण 'Z' की मौत हो जाती है। यहाँ 'A' कोर्ट में यह बचाव (defense) नहीं ले सकता कि केवल पीटने से मौत नहीं हुई थी, या केवल भूखा रखने से मौत नहीं हुई थी। धारा 3(7) के सीधे नियम के अनुसार 'A' ने हत्या (Murder) का अपराध किया है।
अन्य धाराओं के साथ कानूनी जुड़ाव (Legal Linkages):
एक Expert Lawyer और Judge के रूप में आपको इसे BNS की अन्य धाराओं से जोड़ना (link) आना चाहिए:
- धारा 3(4) के साथ संबंध: यह धारा इसी प्रारंभिक अध्याय की धारा 3(4) का व्यावहारिक विस्तार (practical extension) है, जो पहले ही स्थापित कर चुकी है कि 'किए गए कार्यों' (acts done) को दर्शाने वाले शब्दों का विस्तार 'अवैध चूकों' (illegal omissions) पर भी लागू होता है।
- धारा 2(15) का महत्व: इस नियम को लागू करने के लिए 'चूक' (omission) का 'अवैध' (illegal) होना जरूरी है। यदि 'A' की 'Z' को खाना देने की कोई कानूनी जिम्मेदारी (legal duty) ही नहीं होती, तो उसका खाना न देना 'अवैध चूक' नहीं माना जाता।
(Expert Note: आपकी न्यायिक परीक्षाओं की स्वतंत्र तैयारी के लिए बता दूँ कि BNS की यह धारा 3(7) पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 36 के बिल्कुल समान है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे हमेशा 'Cause and Effect' (कारण और प्रभाव) के सिद्धांत के रूप में लागू किया है, जहाँ कार्य और चूक दोनों मिलकर एक ही आपराधिक परिणाम (criminal result) लाते हैं।)
So my dear students, always remember that in Criminal Law, mixing an illegal omission with a physical act does not dilute the crime; it completes it! Keep this concept crystal clear in your mind and keep revising!
