आज हम भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 3(8) (Section 3 Clause 8) का गहराई से विश्लेषण (deep analysis) करेंगे, जो 'कई कार्यों में सहयोग' (Co-operation in several acts) के सिद्धांत (principle) को स्थापित करती है।
धारा 3(8) का कानूनी प्रावधान (Legal Provision):
इस धारा के अनुसार, जब कोई अपराध कई अलग-अलग कार्यों (several acts) के माध्यम से किया जाता है, तो जो कोई भी व्यक्ति जानबूझकर (intentionally) उनमें से कोई एक कार्य करके उस अपराध में सहयोग (cooperates) करता है—चाहे वह अकेले काम करे या किसी अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर—वह व्यक्ति उस पूर्ण अपराध का दोषी माना जाता है।
सरल शब्दों में अर्थ (Meaning in Simple Words):
मान लीजिए किसी बड़े अपराध को अंजाम देने के लिए उसे छोटे-छोटे हिस्सों (parts) में बाँट दिया गया है। यदि आप जानबूझकर उस आपराधिक योजना का केवल एक छोटा सा हिस्सा भी पूरा करते हैं, तो कानून आपको यह कहकर नहीं छोड़ेगा कि आपने पूरा काम नहीं किया। कानून की नजर में आपने उस पूरे अपराध को अंजाम दिया है।
Short Trick for Memory:
Exams के लिए इस सिद्धांत को "IC-SA" (Intentional Co-operation in Several Acts = Full Offence) के फार्मूले से याद रखें। जहाँ 'Intentional Co-operation' है, वहाँ हर व्यक्ति पूरे अपराध के लिए जिम्मेदार है।
आइए इसे BNS में दिए गए तीन बहुत ही शानदार दृष्टांतों (Illustrations) से समझते हैं, जो Judicial Exams में सीधे तौर पर पूछे जाते हैं:
1. धीमा जहर (Slow Poisoning) का मामला:
A और B एक समझौते (agreement) के तहत Z की हत्या करने की योजना बनाते हैं। वे अलग-अलग समय पर Z को जहर की छोटी-छोटी खुराक (small doses) देते हैं। उन कई खुराकों के प्रभाव से Z की मृत्यु हो जाती है। यहाँ यद्यपि A और B के कार्य अलग-अलग (separate) थे, लेकिन उन्होंने हत्या करने में 'जानबूझकर सहयोग' (intentionally cooperate) किया, इसलिए दोनों हत्या के पूर्ण अपराध के दोषी हैं।
2. संयुक्त जेलर (Joint Jailors) का मामला:
A और B एक जेल के संयुक्त जेलर हैं और 6-6 घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं। दोनों का इरादा Z (कैदी) को मारने का है। वे जानबूझकर सहयोग (knowingly cooperate) करते हुए अपनी-अपनी ड्यूटी के दौरान Z को खाना नहीं देते (illegal omission)। अंततः Z भूख से मर जाता है। चूँकि दोनों की मिलीभगत थी, दोनों हत्या (Murder) के दोषी हैं।
3. Exam Twist - बिना सहयोग के कार्य (Act without Co-operation):
यह Illustration सबसे ज्यादा तकनीकी (technical) है! मान लीजिए A एक जेलर है और Z को मारने के इरादे से उसे खाना नहीं देता। Z काफी कमजोर हो जाता है, लेकिन मरता नहीं है। फिर A को नौकरी से निकाल दिया जाता है और उसकी जगह नया जेलर 'B' आ जाता है। अब ध्यान दें: B की A के साथ कोई मिलीभगत या सहयोग (collusion or cooperation) नहीं है। लेकिन B भी स्वतंत्र रूप से Z को मारना चाहता है और उसे खाना नहीं देता, जिससे Z भूख से मर जाता है।
- फैसला (Verdict): चूँकि B ने Z की मौत का कारण बनने वाला अंतिम कार्य किया, B हत्या (Murder) का दोषी है। लेकिन चूँकि A ने B के साथ सहयोग (cooperate) नहीं किया था, इसलिए A की जिम्मेदारी अलग तय होगी। A केवल 'हत्या के प्रयास' (Attempt to Murder) का दोषी माना जाएगा।
(Expert Note: आपकी न्यायिक परीक्षाओं की स्वतंत्र तैयारी के लिए मैं यहाँ सुप्रीम कोर्ट के Jurisprudence से एक अतिरिक्त जानकारी जोड़ रहा हूँ, जो वर्तमान स्रोतों से बाहर की है। यह धारा 3(8) पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 37 के बिल्कुल समान है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस धारा को लागू करने के लिए अपराधियों के बीच 'Cooperation' (सहयोग) साबित करना अनिवार्य है। यह सिद्धांत BNS की धारा 3(5) - Common Intention - के साथ मिलकर काम करता है, जहाँ अलग-अलग लोग एक ही आपराधिक परिणाम को पाने के लिए अलग-अलग कृत्य करते हैं।)
So my dear students, always remember that in Criminal Law, contributing even a fraction of an illegal act towards a larger pre-planned crime makes you entirely liable for the whole outcome! Keep your concepts clear and keep revising.
